मेरी सुहागरात की चुदासी चीखें

 
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Meri Suhagrat ki Chudasi Cheekhen

नमस्ते दोस्तो, यह मेरी सुहागरात की कहानी है।

मेरी लव-मैरिज हुई है और हम शादी से पहले ही चुदाई यानि सुहागरात और सुहागदिन भी यानि सेक्स कर चुके हैं..

पर आज की रात मतलब असली सुहागरात को जो मेरे पति ने किया मज़ा ही आ गया।

मेरी जेठानी भाभी ने मुझे आँख मार कर एक गोली दी और कहा- इसे खा ले.. वरना एक बार में ही पेट से हो जाएगी और आगे ठुकवाने का मौका गायब हो जाएगा।

उनकी बातों से आपको मालूम हो गया होगा कि हमारे परिवार में सब खुली विचारधारा के हैं।

सास भी बोली- भाई, मैं तो चली अपने कमरे में.. बहू तू भी जा.. शादी में एक हफ्ते से वक्त ही नहीं मिला.. चलो थोड़ा हम भी खुद को घिसवा लें.. इसकी तो आज सुहागरात है.. कितना नीचे दबेगी यह तो सुबह ही पता चलेगा।

सासू माँ यह बोलती हुईं मुझे ‘गुड-लक’ कह कर चली गईं।

मेरे पति संजय मुझे बहुत प्यार करते हैं और उनके डिंपल पे मैं फ़िदा हूँ।

वो कमरे में आए और गिफ्ट में मुझे एक हीरे की अंगूठी पहना दी, बोले- आज हमारी सुहागरात है, आज कुछ ज्यादा मज़ा आएगा जानू.. इसके पहले वो बात नहीं थी..

मैंने पीली साड़ी पहनी थी और बहुत कम जेवर पहने हुए थे.. मैं बहुत ही सुन्दर दिख रही थी।

‘आज तुम्हें फाड़ दूँगा..’

मैं मन ही मन खुश हो गई।

वो बोले- अपनी पैंटी तो उतारो ज़रा..

मुझे लगा.. पता नहीं क्या करने वाले हैं?

मैंने साड़ी उठाई, अन्दर हाठ डाल के नीचे से पैंटी उतार दी..

उन्होंने उसको सूँघा और बोले- आँखें बंद करो।

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मैंने आँखे बंद कर लीं।

उन्होंने मुझे लिटा कर एक गरम जैल सा पदार्थ मेरी चूत के मुँह पर डाला और बोले- मैं बाथरूम हो कर आता हूँ.. यूँ ही लेटी रहना।

मैं लेटी रही.. वो थोड़ी देर बाद आए और पूछा- कुछ हुआ?

मैंने कहा- हाँ.. मैं अचानक चुदने को तड़प रही हूँ.. संजय मेरी छाती तक में सिहरन हो रही है।

बोले- मेरी जान, यह तो बात है।

उन्होंने धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतारे और मेरे मम्मों को चाटने लगे।

मेरे मुँह से ‘स्स्स… स्स्स्स्स…’ सिसकारी निकल पड़ी और धीरे-धीरे मेरी चूचियाँ और कड़ी और निप्पल कड़क होते गए।

ये बार-बार मेरी दोनों छातियों को मसल रहे थे और काट-काट कर लाल किए जा रहे थे।

इन्होंने अपना एक हाथ चूत पर रखा और बोले- हाय, तुम तो पानी से भर गई हो.. मेरा क्या होगा?

मैंने कहा- जो होगा.. आपको पापा कहेगा।

यह सुनते ही मुझसे लिपट गए और बोले- बोलो तो बना दूँ माँ?

मैंने कहा- अभी तो मेरी तड़प मिटा दो.. संजय।

ये धीरे-धीरे अपनी ऊँगली मेरी चूत की दरार पर चलाने लगे और बोले- मेरी जान ये साफ़ चूत खा जाऊँगा।

मैंने कहा- किसका इंतज़ार है फिर.. खा लीजिए न.. यह फ़ुद्दी आपकी ही है..

ये नीचे गए और अपना मुँह सीधा मेरी चूत के मुहाने पर रख कर जीभ से चाट दिया।

‘आआह्ह्ह्ह्ह्ह…’

दोस्तो, मैं क्या बताऊँ.. क्या हुआ मुझे.. मैंने अपने चूतड़ उठा कर अपनी चूत उसके मुँह के पास ला दी।

ये मेरे सुराख में ऊँगली डालते हुए मुझे चाटने लगे।

मैंने कहा- संजय प्लीज.. आज मुझे पूरी तरह से बर्बाद कर दीजिए..

इन्होंने अपनी नाक से मेरी चूत को सूंघा और बोले- ये तो शुरुआत है.. हनीमून पर तो तुझे चलने नहीं दूँगा..

मैं मन में अपनी किस्मत पर मुस्कुरा दी।

अब मैंने कहा- संजय अब नहीं रहा जाता।

वो बोले- एक मिनट और..

फिर ढेर सारा वो ही जैल मेरी चूत पर डाल दिया।

मैंने कहा- ये क्या है.. जो मुझे गरम कर देता है और चुदने का दिल और मचलने लगता है?

बोले- यही तो सीक्रेट है जान..

संजय ने थोड़ा सा जैल अपने लण्ड पर भी लगाया।

मैंने कहा- संजय आओ..

मैंने उनको फिल्मों के हीरो की तरह बाँहों में खींच लिया..

ये उत्तेजित हो गए और मेरी दोनों टाँगें उठा कर झट से लंड मेरी सिसियाती चूत में डाल दिया।

मुझे तो जैसे हिचकी सी लग गई।

मैंने कहा- आपने ऐसा पहले तो कभी नहीं किया।

तो बोले- आज तुम मेरी बीवी हो.. अब तो ऐसा चोदूँगा कि हर दिन कहोगी.. चूत फट गई है..

खैर.. थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा नशा सा हुआ लगा कि अन्दर तूफ़ान मचा है।

मैंने कहा- संजय ये बहुत अच्छा जैल है.. मुझे मेरे दूध बड़े से लग रहे हैं.. भरे-भरे भी और बच्चेदानी बहुत खुल गई है.. तो दिल और भी कह रहा है सारी रात तुम्हारे नीचे अपना पानी छोड़ कर गुजार दूँ।

ये हंस दिए और बोले- शुरू करूँ..?

मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया.. इन्होंने अपने दोनों हाथों को मेरे कन्धों के नीचे लिया और सपोर्ट बना कर एक झटका दिया।

मैंने सुरूर में सिसियाई- आआह्ह्ह… ह्ह संजय.. मेरी जवानी निचोड़ दो आज..

मैंने अपनी दोनों टाँगें इनकी कमर में जकड़ दीं।

ये मुझे ‘घच्च्च्च्च घच्च्च्छ्ह’ ठोकने लगे।

मैं नीचे से अपनी गांड उछाल-उछाल कर धक्कों में सपोर्ट देने लगी।

ये बोले- हाय मेरी जान.. आज से पहले इतनी सी देर में यूँ न करती थीं।

मेरे मुँह से ‘आआअह्ह्ह्ह.. और करो..’ निकल पड़ा।

ये संजय को भा गया।

मैंने कहा- संजय मुझे नशा सा हो रहा है।

मैं अपनी चूत को इनके नीचे गोल-गोल घुमाने लगी.. ये भी लंड को वैसे ही घुमाते हुए बोले- तनीषा, आज तू मेरी औरत बन गई।

मैं यह सुन कर निहाल हो इनसे चिपटने को हुई तो इन्होंने दोनों मम्मों को पकड़ कर ज़ोरदार धक्का दिया और झट से बाहर आ गए और फिर अपना मुँह चूत पर रख कर मुझे मेरे चूतड़ों से पकड़ लिया और अन्दर के होंठ ‘लपलप’ चाटने लगे।

मैंने कहा- संजय मैं झड़ जाऊँगी।

तो ये थोड़ी देर अलग हट गए और मेरे ऊपर आकर बाल सहलाने लगे।

बोले- अभी नहीं आज तुझे पूरा अन्दर तक झड़ूँगा..

तीस सेकंड बाद फिर लण्ड डाल दिया और मेरे गर्दन पर दांत रख दिए।

मैंने कहा- जानू दर्द होता है।

ये बोले- होने दे.. तेरे निशान से मुझे प्यार आएगा।

अब संजय ने मेरी ‘घपाघप’ चुदाई बढ़ा दी।

मैं- आआह्ह्ह्ह.. आआह्ह्हह.. करो और अन्दर तक डालो जानू.. मेरी बच्चेदानी प्यासी न रह जाए..

बोले- ये नहीं होने दूँगा..

मैं ‘आआह्ह्ह आअह्ह्ह..’ करके उछल-उछल कर अपने चूतड़ों को इनके और करीब लाकर चुदवाने लगी।

मैंने इनकी गांड को जोर से पकड़ा तो ये बोले- मुझे तुम्हारी गांड के नीचे तकिया लगाने दो।

इन्होंने तकिया लगाया और अपना लण्ड अन्दर सरका कर बोले- अब देख तेरी बच्चेदानी क्या कहती है।

मैंने कहा- जानू मेरी चूत लो.. और लो आआअह्ह्ह.. इतना जोर का चोदो कि मैं भूल ही न पाऊँ..आह्ह..

ये जोश में आते जा रहे थे.. बोले- हाँ.. मेरी रानी.. तेरे दूध तो मुझे और पागल कर रहे हैं इनमें अपने लिए जल्दी दूध उतारना पड़ेगा.. आआअह्ह्ह.. ले और अन्दर डालूँ..

मैंने कहा- हाँ..आआन्न्न्न्न मेरे राजाआआ.. आआह्ह्ह्ह!

चुदाई की जोर-जोर से ‘घ्छ्छ्ह्ह्ह्ह्ह.. घछह्ह’ की आवाजें आने लगीं।

मैं और टाँगें खोल-खोल कर इनको जूनून दे रही थी।

ये बोले- रानी.. देख कितना रस टपका कि तेरी चादर तेरे रस से भर गई।

मैंने भी देखा तो चादर पे गीला बड़ा सा दाग था।

इन्होंने मुझे पलंग के कोने पे घसीट लिया और मेरी टाँगें अपने कन्धों पर रख कर लण्ड अन्दर डालने लगे और मेरे निप्पल कस कर मसल दिए।

मुझे बेहद दीवानगी हो रही थी, पलंग आवाज़ करने लगा था.. मैं पीछे हटी और बिस्तर पर लेट गई।

ये फिर ऊपर चढ़े और मुझे इतना कसकर जकड़ लिया कि मेरे जवान जिस्म की हड्डियाँ चटक गईं।

मैं ‘आआअह्ह्ह संजूउय्य्य बहुत मज़ा आ रहा है.. आआयईई इस्स्स् मेरी मैयाअ हाय्य्यए सन्नजाआयय ऊऊऊ एअह्ह्ह्ह्ह जल्दी जल्दी करो.. मैं झड़ने को हूँ.. मेरा होने वाआआल्लआआअ हाआय्य्ऎ.. चोदॊऒ नाआआआअ..

यह मौका देख कर मेरी घुंडियों को मसलने लगे मैं तो बस निहाल होकर ‘आआअह्ह्ह्ह्ह.. मेरे सन्जाय्य्य हाअन्न्न्न्न आआहह्ह्हाआन्न्न..” करते हुए चूत को और ऊपर उठाने लगी।

‘संजय.. मेरा.. हो रहा हैं संजय..अह.. मेरी चूत झड़ने को है.. मुझे बाँहों में जकड़ लो..’ करते हुए मेरी टाँगें हवा में होकर थरथराने लगीं।

संजय ने झट से मुझे अपने से चिपका लिया- हाँ मेरी जान..

मैं संजय की छाती से लग कर सिसियाने लगी- आआअह्ह्हाआआअ.. मेरी चूत बह रही है… संजय मेरा पूरा पानी निकाल दो.. नाआ आआह्ह्ह्ह्ह्ह.. लो न मेरी चूत और लो.. भोसड़ा बना दो.. संजय आआह्ह्ह्ह्ह..

मैं नीचे से ज़ोरदार धक्के देने लगी.. मुझे लगा, ये क्यों रुके हैं।

तो ये बोले- तुम ही करो जानू.. भरपूर झड़ोगी..

इन्होंने मेरे चूतड़ों के बीच में मेरी गाण्ड के छेद में उंगली डाल दी।
मैं उछली तो लंड और अन्दर सैट हो गया।

मैंने मादक कराह निकाली- आआअह्ह्ह हय मेरी मैय्य्य्य्या.. स्स्स् भोसड़ा बना दो मेरा छेद हायईई संजय्य्य्य.. मैं गई.. मेरा पानी निकलाआआअ.. आअह्ह्ह मेरा हो याआआआ अय हय..

मैं तो ख़त्म हो गई.. पर संजय अभी वैसे ही थे।
मैंने हाँफते हुए कहा- क्या हुआ.. क्या आप नहीं हुए?

तो ये बोले- नहीं.. तुझे जब तक आज पूरा न निकाल दूँ.. एक बूँद नहीं आऊँगा।

मैं अब शिथिल हो चुकी थी..

उस रात मेरी सुहागरात में मेरे झड़ने के करीब बीस मिनट तक संजय ने मुझे और चोदा और मैं फिर से उत्तेजित होकर चुदाई में ठोकरें लगाने और खाने लगी थी।

फिर समागम हुआ और हम दोनों एक-दूसरे की बाँहों में बाँहें डाल कर सो गए।

दोस्तो, ये मेरी सुहागरात की कामुक कराहें आपकी नजर हैं।



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